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नई दिल्ली, 06 जुलाई: विश्व जूनोसिस दिवस, ऐसी बीमारियों के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए मनाया जाता है, जो संक्रामक बीमारी है। साफ शब्दों में कहा जाए तो जूनोटिक ऐसी बीमारी है जो जानवरों से मनुष्यों में और फिर मनुष्यों से जानवरों में फैलती है। जब ये बीमारी मनुष्यों से जानवरों में फैलती है तो इसे रिवर्स जूनोसिस कहा जाता है। ऐसी ही बीमारियां इबोला, एवियन इन्फ्लूएंजा और वेस्ट नाइल वायरस जैसे जूनोटिक बीमारियों के खिलाफ पहले टीकाकरण की याद में हर साल 6 जुलाई को विश्व जूनोसिस दिवस मनाया जाता है।
विश्व जूनोसिस दिवस क्यों मनाया जाता है?
प्रकृति दृष्टि से देखें तो जानवरों और इंसानों में कोई खास फर्क नहीं है। इंसान भी अन्य जानवरों की तरह ही जीवों की एक प्रजाति है। लेकिन इंसान इस मामले में अलग है की वो सामाजिक हो गया है और ज्यादा साफ-सफाई के साथ रहने लगा है। बुद्धि और क्षमता में अधिक होने के कारण इनसार अपनी रक्षा के उपाय कर सकता है और परिस्थितियों को कुछ हद तक कंट्रोल भी कर सकता है। वहीँ जानवरों का अपने शरीर, अपने मस्तिष्क और क्षमता पर इतना कंट्रोल नहीं होता।
यही कारण है कि बैक्टीरिया, वाइरस के कारण जानवरों में बहुत सारी बीमारियां पायी जाती है। इन्ही बिमारियों से जानवर मरते रहते हैं और प्रकृति का संतुलन भी बना रहता है। कई बार जानवरों से यही बीमारियां इंसानों के शरीर में प्रवेश कर जाती है। ऐसी संक्रामक बिमारियों को ही जूनोसिस कहा जाता है। लेकिन प्रकति से संघर्ष और विकास की दौड़ में हजारों सालों से इंसान और जानवर साथ-साथ दौड़ रहे हैं और शायद हमेशा दौड़ते रहेंगे। जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाले संक्रामक रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 6 जुलाई को विश्व जूनोसिस दिवस मनाया जाता है।
क्या है जूनोसिस?
जूनोसिस एक ग्रीक शब्द है जो ज़ून और नोसोस से मिलकर बना है। यहां जून से मतलब पशु या जानवर से है और नोसोस से मतलब बीमारी या रोग से है। हिंदी में कहा जाय तो जूनोसिस का मतलब पशु जन्य रोग से है। ऐसे रोग जो जानवरों से मनुष्यों में फैलते हैं, जूनोसिस या जूनोटिक रोग कहलाते हैं। जूनोसिस संक्रमण प्रक्रिया प्रकृति या मनुष्यों में जानवरों के अलावा बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी के माध्यम से फैलती है।
जूनोटिक संक्रमण को रोकने के उपाय:-
जूनोटिक रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
स्वास्थ्य पहल को बढ़ावा देने वाले Interdisciplinary त्तरीकों में निवेश।
जूनोटिक रोगों पर वैज्ञानिक खोज और अनुसंधान को बढ़ावा देना।
खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए वैकल्पिक तरीकों को विकसित किया जाना चाहिए ताकि आवास स्थलों और जैव विविधता का संरक्षण किया जा सके।
सभी देशी में स्वास्थ्य के क्षेत्र में हिस्सेदारों के क्षमताओं को मजबूत बनाने की भी बात कही गई है।
जैव सुरक्षा और नियत्रण में सुधर लाना।
जूनोटिक बिमारियों के होने के कारणों पहचान करना और उनके नियंत्रण के तरीकों को बढ़ावा देना।
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